10 जजों ने फुटेज देखकर दिया फैसला आमतौर पर मुकाबले का फैसला तीन जजों के पैनल से होता है, लेकिन इस मामले में उपलब्ध सभी फुटेज की समीक्षा 10 जजों के पैनल ने की।

समीक्षा के बाद किसी एक खिलाड़ी को विजेता नहीं चुना गया और मुकाबले को आधिकारिक तौर पर ड्रॉ घोषित किया गया।

इसके बाद मुकाबले का नतीजा तय करने के लिए टूर्नामेंट के नियम लागू हुए।

नियमों के अनुसार बराबरी की स्थिति में खिलाड़ियों के शरीर के वजन को आधार बनाया जाता है।

यहीं सुचिका का फाइनल में पहुंचने का सपना टूट गया।

700 ग्राम ने बदल दिया पूरा नतीजा सुचिका अपनी सिंगापुर की प्रतिद्वंद्वी तेओ हुई हून से 700 ग्राम अधिक वजन की थीं।

ड्रॉ होने के बाद वजन के नियम के तहत फैसला सिंगापुर की खिलाड़ी के पक्ष में चला गया और सुचिका फाइनल की दौड़ से बाहर हो गईं।

इस तरह मैट पर मुकाबला बराबरी का रहने के बावजूद सुचिका को फाइनल में जगह नहीं मिल सकी।

पहले राउंड में सुचिका का दबदबा सेमीफाइनल की शुरुआत में सुचिका ने आक्रामक अंदाज अपनाया।

उन्होंने घुटने से कई वार किए और तेओ को लगातार क्लिंच में रखकर मुकाबले पर नियंत्रण बनाने की कोशिश की।

पहले राउंड के करीब दो मिनट बाद सुचिका ने सिंगापुर की खिलाड़ी को जमीन पर गिराया और कई मुक्के लगाए।

तेओ के दोबारा खड़े होने के बाद भी भारतीय खिलाड़ी ने कॉम्बिनेशन पंच जारी रखे।

राउंड खत्म होने का हूटर बजने के बाद भी दोनों खिलाड़ी एक-दूसरे पर वार करती रहीं।

स्थिति को संभालने के लिए रेफरी को दोनों को अलग करना पड़ा।

दूसरे राउंड में दोनों के बीच कांटे की टक्कर दूसरे राउंड में सुचिका ने अपनी रणनीति बदली और तेओ की पहुंच से दूर रहने की कोशिश की।

उनके कोच लगातार उन्हें करीब जाकर क्लिंच करने के लिए कह रहे थे।

राउंड की शुरुआत में तेओ ने दबदबा बनाया और सुचिका को सबमिशन कर दिया।

हालांकि, भारतीय खिलाड़ी ने जल्द वापसी की और तेओ के ऊपर पहुंच गईं।

इसके बाद सिंगापुर की खिलाड़ी ने एक बार फिर सुचिका को सबमिट किया।

राउंड के आखिरी हिस्से में सुचिका सबमिशन से बाहर निकलने में सफल रहीं और उन्होंने तेओ को भी सबमिट कर दिया।

उन्हें लगा कि उन्होंने मुकाबला अपने नाम कर लिया है, लेकिन निर्णायक नतीजे के लिए फैसला बाकी था।

जज किसी एक खिलाड़ी के प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए और मुकाबला तीसरे और आखिरी राउंड तक पहुंच गया।

आखिरी राउंड के बाद सुचिका की आंखों में आंसू तीसरे राउंड में तेओ ने कई किक्स लगाईं।

सुचिका कुछ हद तक रक्षात्मक रहीं और निर्णायक वार के मौके का इंतजार करती रहीं।

मुकाबले के आखिरी पलों में सुचिका ने कुछ कॉम्बिनेशन पंच लगाए।

अंतिम बजर बजने के बाद सुचिका ने अपनी प्रतिद्वंद्वी पर छलांग लगाकर उसे जमीन पर गिरा दिया।

मुकाबला खत्म होने के बाद सुचिका फैसले से खुश नहीं थीं।

उन्होंने रेफरी से हाथ मिलाने से भी इनकार कर दिया और मैट पर ही भावुक होकर रोने लगीं।

सुचिका को लगा कि उन्होंने फाइनल में पहुंचने के लिए पर्याप्त प्रदर्शन किया है।

हालांकि, समीक्षा के बाद मुकाबला ड्रॉ घोषित हुआ और 700 ग्राम के वजन के अंतर ने फैसला सिंगापुर की खिलाड़ी के पक्ष में कर दिया।

फाइनल से चूकने के बावजूद सुचिका ने भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता।

पारंपरिक मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में यह भारत का ऐतिहासिक पदक रहा।

नियम क्या कहते हैं? एशियन MMA के नियमों के मुताबिक, ओवरटाइम में मुकाबला ड्रॉ होने की स्थिति में पहले यह देखा जाता है कि दोनों में से किसी खिलाड़ी को मुकाबले के दौरान चेतावनी मिली थी या नहीं।

अगर दोनों खिलाड़ियों को बराबर संख्या में चेतावनियां मिली हैं, तो उन्हें दी गई सलाह/निर्देश को ध्यान में रखा जाता है।

अगर दोनों खिलाड़ियों को दी गई सलाह भी समान है, तो मुकाबले से पहले उनका वजन देखा जाता है।

अगर मुकाबले से पहले दोनों खिलाड़ियों का वजन भी समान हो, तो मुकाबले के बाद का वजन देखा जाता है।

अगर मुकाबले के बाद का वजन भी समान रहता है, तो तीन सहायक रेफरी झंडे उठाकर विजेता का फैसला करते हैं।

सुचिका के मामले में 700 ग्राम का वजन निर्णायक साबित हुआ।

वजन के आधार पर तेओ ने मुकाबला जीत लिया और सुचिका फाइनल में पहुंचने से चूक गईं।

आधिकारिक तौर पर इस नतीजे को 'ब्रेक टाई बाई वेट' यानी वजन के आधार पर बराबरी तोड़कर जीत के रूप में दर्ज किया गया।

36 वर्षीय सुचिका ने इसके बावजूद कांस्य पदक जीतकर भारतीय MMA में अपनी खास पहचान बनाई।

उनकी संघर्ष और वापसी की कहानी युवा भारतीय MMA खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन सकती है।

मुख्य बातें

  • 10 जजों ने फुटेज देखकर दिया फैसला आमतौर पर मुकाबले का फैसला तीन जजों के पैनल से होता है, लेकिन इस मामले में उपलब्ध सभी फुटेज की समीक्षा 1…
  • समीक्षा के बाद किसी एक खिलाड़ी को विजेता नहीं चुना गया और मुकाबले को आधिकारिक तौर पर ड्रॉ घोषित किया गया।
  • इसके बाद मुकाबले का नतीजा तय करने के लिए टूर्नामेंट के नियम लागू हुए।

स्रोत और संदर्भ

  1. अमर उजाला · एशियन गेम्स में सुचिका तरियाल के साथ हुई बेईमानी?: बराबरी का रहा मुकाबला, फिर क्यों फाइनल की रेस से हुईं बाहर? ↗21 सितंबर 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 21 सितंबर 2026।

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