कैसे शुरू हुआ सफर? समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में अभिषेक आनंद ने अपने सफर को अविश्वसनीय बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी जापान की राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने के बारे में नहीं सोचा था।

उन्होंने कहा, 'जापान तक का मेरा सफर काफी अविश्वसनीय रहा है और मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं जापान की राष्ट्रीय टीम के लिए खेलूंगा।

कॉलेज प्लेसमेंट के दौरान जापानी कंपनियां आई थीं।

हालांकि मैंने विदेश जाने का कोई प्लान नहीं बनाया था।

मैं भारत में ही रहकर नौकरी और क्रिकेट दोनों जारी रखना चाहता था।

फिर भी मैंने इंटरव्यू देने का फैसला किया और एक्सेंचर जापान के लिए चुन लिया गया।' दो घंटे में लिया जापान जाने का फैसला अभिषेक के मुताबिक, जापान जाने का फैसला उनके लिए अचानक आया।

एक्सेंचर से ऑफर मिलने के बाद उन्हें इसे स्वीकार करने या नहीं करने के लिए सिर्फ दो घंटे का समय दिया गया था।

इसी दौरान उन्होंने जापान में क्रिकेट के बारे में जानकारी जुटाई।

उन्होंने बताया, 'ऑफर स्वीकार करने या न करने का फैसला करने के लिए मुझे दो घंटे का समय दिया गया था।

मैंने जापान में क्रिकेट के बारे में जानकारी जुटाई और पाया कि उनकी टीम ईस्ट एशिया-पैसिफिक वर्ल्ड कप क्वालिफायर के लिए क्वालिफाई कर चुकी थी।

मैंने ऑफर स्वीकार कर लिया और जापान चला गया।' जापान पहुंचने के बाद अभिषेक टोक्यो फाल्कन्स क्रिकेट क्लब से जुड़े और करीब तीन साल तक क्लब क्रिकेट खेला।

इस दौरान उनके प्रदर्शन पर जापान क्रिकेट एसोसिएशन (जेसीए) की भी नजर पड़ी और 2025 में उन्हें राष्ट्रीय टीम में चुन लिया गया।

तीन साल में पूरा हुआ राष्ट्रीय टीम का सपना जापान की राष्ट्रीय टीम में चयन की प्रक्रिया के बारे में अभिषेक ने बताया कि इसके लिए कुछ पात्रता शर्तें पूरी करनी होती हैं।

उनके मुताबिक, खिलाड़ी के लिए लगातार तीन साल जापान में रहना, जापान में जन्म लेना या जापानी पासपोर्ट होना पात्रता के प्रमुख आधार हैं।

उन्होंने कहा, 'मेरे मामले में जापान में लगातार तीन साल रहने की पहली शर्त पूरी हो गई थी।

इसके साथ ही जापान में क्रिकेट को लेकर आपका प्रदर्शन और अनुशासन भी देखा जाता है।

चूंकि मैंने ये दोनों शर्तें पूरी की थीं, इसलिए इसी तरह मैं नेशनल टीम में शामिल हुआ।' अभिषेक को उम्मीद थी कि राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने में उन्हें चार से पांच साल लग सकते हैं, लेकिन उनका चयन महज तीन साल में हो गया।

उन्होंने कहा, 'उस समय मुझे उम्मीद नहीं थी कि मैं सिर्फ तीन साल में नेशनल टीम में जगह बना पाऊंगा।

मैं बहुत उत्साहित था क्योंकि मुझे लगा था कि टीम में आने में कम से कम चार-पांच साल लगेंगे, लेकिन मेरा चयन सिर्फ तीन साल में ही हो गया।

मैं बहुत खुश था और मैंने अपने क्लब के सदस्यों, मैनेजरों और परिवार को इसकी जानकारी दी।

वे सभी भी इसे लेकर बहुत उत्साहित थे।' जापान में तेजी से बढ़ रहा है क्रिकेट अभिषेक ने जापान में क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव को भी करीब से देखा है।

उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जापान में क्रिकेट ने तेजी से प्रगति की है और पुरुषों के साथ-साथ महिला क्रिकेट में भी विकास हुआ है।

उन्होंने कहा, 'जब से मैं यहां आया हूं, जापान में क्रिकेट बहुत तेजी से आगे बढ़ा है।

जब से मैं जापान टीम से जुड़ा हूं, तब से इसमें जबरदस्त तरक्की हुई है, चाहे वह महिला टीम हो या पुरुष टीम।

क्रिकेट में काफी विकास हुआ है और मुझे लगता है कि आने वाले कुछ वर्षों में यह दुनियाभर में पहचानी जाने वाली टीमों में से एक बन जाएगी।' भारत-जापान मैच को लेकर उत्साहित भारत और जापान के बीच मुकाबले को लेकर भी अभिषेक काफी उत्साहित हैं।

हालांकि वह इस मुकाबले के लिए टीम में शामिल नहीं हैं, लेकिन टीम के साथ रहकर जापान को समर्थन देने की योजना बना रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'देखिए, मैं उस मैच को लेकर उत्साहित हूं।

हालांकि मैं टीम में शामिल नहीं हूं, लेकिन मैं टीम के साथ रहकर उन्हें सपोर्ट करूंगा।

चूंकि मैं भारत से हूं, इसलिए मैं भारत और जापान दोनों को सपोर्ट करूंगा।'

मुख्य बातें

  • कैसे शुरू हुआ सफर? समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में अभिषेक आनंद ने अपने सफर को अविश्वसनीय बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी जापान की राष्ट…
  • उन्होंने कहा, 'जापान तक का मेरा सफर काफी अविश्वसनीय रहा है और मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं जापान की राष्ट्रीय टीम के लिए खेलूंगा।
  • कॉलेज प्लेसमेंट के दौरान जापानी कंपनियां आई थीं।

स्रोत और संदर्भ

  1. अमर उजाला · जब एक फैसले से बदली जिंदगी: जापान में नौकरी से शुरू हुआ सफर, क्रिकेट के जुनून ने अभिषेक आनंद को दिलाई पहचान ↗21 सितंबर 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 21 सितंबर 2026।

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