हिंदी की लहर, खबर तक। रीवा वाले सिनेमा की बात करें तो भाषा पहले आती है — बघेली। फरवरी 2025 में मंजूर फिल्म पर्यटन नीति स्थानीय और जनजातीय भाषा की फिल्मों पर दस प्रतिशत अतिरिक्त लाभ लिखती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में मालवी, बुंदेली, बघेलखंडी, निमाड़ी, गोंडी, भीली, कोरकू नाम हैं।
Tarang HINDI रीवा में कोई काल्पनिक महोत्सव नहीं जोड़ता। जो कागज है, वह नीति का है। शूटिंग के 75 प्रतिशत दिन प्रदेश में होने चाहिए — यही शर्त मुख्य नीति में है। अनुदान की स्लैब अलग पन्ने पर हैं: फीचर तक दो करोड़, अंतरराष्ट्रीय तक दस करोड़। बघेली वाला दस प्रतिशत इन्हीं स्लैब के ऊपर अतिरिक्त है, नई स्लैब नहीं।
भाषा की शर्त, शहर की पहचान
आवेदन फिल्म सेल, एमपीऑनलाइन — filmcell.mponline.gov.in। एकल खिड़की, 15 दिन का लक्ष्य पर्यटन पन्ना लिखता है। रीवा का निर्माता अगर बघेली में कहानी कहे, तो नीति की पंक्ति उसके काम की है। कितनी फिल्में अभी पास हुईं, स्रोत ने जिलावार नहीं गिना। हम अनुमान नहीं भरते।
खरगोन वाली निमाड़ी खबर अलग पन्ने पर है। यहाँ सिर्फ़ बघेली और रीवा। दो भाषाएँ, दो शहर, एक नीति — अख़बार उन्हें एक कार्ड में नहीं मिलाता। रीवा वाले निर्माता को भाषा के बॉक्स में बघेली लिखनी होगी, खरगोन नहीं। शर्तें पूरीं तब अतिरिक्त लगेगा। कितना पैसा किस फिल्म को मिला, सेल की सूची आने पर नई लहर जाएगी।
फोटो लोक नृत्य का फ़ाइल चित्र है। रीवा के किसी मंच का दावा नहीं। कैप्शन यही कहता है।
मुख्य बातें
- नीति 2025 में स्थानीय भाषा पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त।
- बघेली / बघेलखंडी नाम सूची में है।
- रीवा से पढ़ो; अलग मंच की तारीख स्रोत में नहीं।
स्रोत और संदर्भ
- टाइम्स ऑफ इंडिया · MP Film Tourism Policy 2025 — local language extra 10% ↗26 फ़रवरी 2025
- मध्यप्रदेश पर्यटन · Film tourism / Film Policy 2025 ↗18 फ़रवरी 2025
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 19 सितंबर 2026।



